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Jammu: जम्मू-कश्मीर के लोगों पर बिजली विभाग की है 14 हजार करोड़ रुपये देनदारी

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खबर यह है कि स्थानीय उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटी प्रदेश सरकार की बिजली की देनदारी 14164 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, लेकिन राजस्व वसूली कहीं कम है। इसका सीधा भार प्रदेश के खजाने पर पड़ना तय है। इसके साथ ही हालांकि केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार के आग्रह पर जम्मू कश्मीर को 40 किश्तों में यह कर्ज चुकाने की रियायत दी है लेकिन यह भी सुगम नहीं होने वाला है।
इस बारे में बता दें कि
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में प्रदेश प्रशासन इस स्थिति से उभरने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। वह कई बार लोगों से कह चुके हैं कि अगर नियमित और गुणवत्तापूर्ण बिजली चाहिए तो उपभोक्ताओं को बिजली बिल का भुगतान भी समय पर करना चाहिए और बिजली चोरी को रोकने में सहायता करनी होगी। बिजली विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन ;एनटीपीसीद्धए नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन ;एनटीपीसीद्धए जेकेपीडीसीएल समेत अन्य कंपनियों से हर वर्ष लगभग 7500 करोड़ की बिजली खरीदता है जबकि उपभोक्ताओं से राजस्व वसूली मात्र 3200 करोड़ ही है। इस तरह प्रति वर्ष बिजली खरीद घाटा लगभग 4300 करोड़ रुपये है।
बिजली खरीद की बकाया देनदारी के नाम पर प्रदेश सरकार को 12 से 18 प्रतिशत तक ब्याज भी चुकाना पड़ता है। इस वजह से यह देनदारी 14164 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश में बिजली संप्रेषण और वितरण घाटा भी लगातार बढ़ रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव नीतिश्वर कुमार के प्रयासों से केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को 40 किस्तों में बिजली खरीद के बकाया बिल के भुगतान की सुविधा दी है। साथ ही भविष्य में बिजली खरीद का भुगतान निर्धारित समय पर सुनिश्चित करना होगा।
इसमें देरी होने पर बिजली आपूर्ति में कटौती भी संभव है। जम्मू में 50 प्रतिशत और कश्मीर में 65 प्रतिशत वितरण घाटा प्रदेश में दोनों बिजली वितरण निगमों जम्मू ऊर्जा वितरण निगम ;जेपीडीसीएलद्ध और कश्मीर बिजली वितरण निगम ;केपीडीसीएलद्ध का वितरण घाटा लगभग 56 प्रतिशत है। वर्ष 2019.20 के दौरान जेपीडीसीएल का यह लाइन लास 50.57 प्रतिशत था जबकि वर्ष 2020.21 और 2021.22 के दौरान यह क्रमशरू 52ण्17 और 50 प्रतिशत रहा। केपीडीसीएल को वर्ष 2019.20 में 76 प्रतिशतए 2020.21 में 69 प्रतिशत और 2021.22 के दौरान 65 प्रतिशत वितरण घाटा उठाना पड़ा है।