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जम्मू कश्मीर प्रशासन ने घाटी में इंटरनेट बहाल नहीं करने के लिए आतंकी खतरे का जिक्र किया

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जम्मू कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर घाटी में आम आदमी और मीडिया के लिए इंटरनेट सेवाएं बहाल नहीं करने का कारण राष्ट्र विरोधी तत्वों और आतंकवादियों द्वारा इसके संभावित दुरूपयोग को बताया है। इस बीच, यहां शहर में सरकार संचालित मीडिया सेंटर में बुधवार को उस वक्त भावुक दृश्य देखने को मिला, जब मलेशियाई पर्यटकों के एक समूह को यहां आने के बाद से पहली बार इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच मिली। वे 11 जनवरी से कश्मीर की यात्रा पर हैं। उन्हें एक स्थानीय टूर ऑपरेटर मीडिया सेंटर लेकर आया था। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 10 जनवरी को जारी उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करते हुए मंगलवार शाम जम्मू संभाग के पांच जिलों में टूजी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं और पोस्टपेड कनेक्शन बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही, जम्मू और कश्मीर संभागों में अस्पतालों, बैंकों और होटलों जैसी आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों में ब्रॉडबैंड सेवाएं बहाल की गई हैं। प्रधान सचिव (गृह) शालीन काबरा ने मंगलवार देर शाम यह आदेश जारी किया। हालांकि, कश्मीर संभाग के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल नहीं की गई। आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा डेटा सेवाओं के दुरूपयोग से बड़े पैमाने पर हिंसा होने और लोक व्यवस्था में खलल पड़ने की संभावना है, जो कि अब तक विभिन्न एहतियाती उपायों के चलते बरकरार है। काबरा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने केंद्र शासित प्रदेश में संचालित हो रहे आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी चीजें संज्ञान में लाई हैं जिनमें सीमा पार से संचालक, अलगाववादी और राष्ट्र विरोधी तत्वों की गतिविधियां भी शामिल हैं, जो इंटरनेट के जरिए आतंकवाद के लिए लोगों को उकसा रहे हैं और अफवाह फैला रहे हैं, छद्म युद्ध में सहयोग कर रहे हैं, दुष्प्रचार कर रहे हैं तथा असंतोष पैदा कर रहे हैं। आदेश में कहा गया है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर जमीनी स्तर से हासिल कानून व्यवस्था की स्थिति का आकलन कर कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने मौजूदा स्थिति से निपटते हुए यह पाया है कि आतंकवादी सीमा पार से घुसपैठ की, अपने कैडर को सक्रिय करने की और कश्मीर संभाग में तथा जम्मू संभाग के आतंकवाद प्रभावित इलाकों में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां बढ़ाने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं। इस कार्य के लिए वे (आतंकी) केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में अपने सदस्यों से वीओआईपी और इंक्रीप्टेड मोबाइल संचार के जरिए विभिन्न सोशल मीडिया ऐप के जरिए संचार कर रहे हैं। आदेश में कहा गया है, ‘‘…भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए, राज्य की सुरक्षा के लिए और लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसा करने (इंटरनेट तक पहुंच पर पाबंदी) की पूरी तरह से जरूरत है।’’ पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र के पांच अगस्त के फैसले के बाद से जम्मू कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं। जम्मू और कश्मीर, दोनों संभागों में सभी सोशल मीडिया साइटों तक पहुंच पर पाबंदी है। आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया ऐप पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। प्रधान सचिव, गृह विभाग ने भी सरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे आवश्यक एहतियात के लिए जिम्मेदार होंगे। आदेश में कश्मीर के संभागीय प्रशासन को 400 और इंटरनेट कियोस्क स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।