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National Teacher Award 2021: पहलवान से शिक्षक बने संजीव को मिला सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

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रियासी जिले के तहसील पौनी में रहने वाले शिक्षक संजीव कुमार शर्मा को आखिरकार उनकी मेहनत का फल मिल गया। देश में 15वें स्थान और जम्मू-कश्मीर से वे एकमात्र शिक्षक हैं जिन्हें सरकार की तरफ से यह सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
विद्यार्थियों को शिक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन से काम कर रहे संजीव ने मिडिल स्कूल इखनी के प्राइमरी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 13 से 67 तक पहुंचा दी। इसके लिए उन्हें काफी दिक्कतें पेश आई परंतु उन्होंने अपना प्रयास जारी रखे।
शर्मा ने दूसरे बच्चों को इस स्कूल तक लाने के लिए सबसे पहले अपने दोनों बच्चों का इसी स्कूल में दाखिला किया। जिसके बाद क्षेत्र के अन्य बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाने के लिए उनके अभिभावकों से मिलने के लिए उनके घरों तक पहुंच जाते थे। घरों से बच्चों को स्कूल में लाने के बाद उन्हें शिक्षित करने पर बच्चों के अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने उनकी काफी सराहना की। इसके अलावा कोरोना संक्रमण के दौरान लोगों को जागरूक करने, वैक्सीनेशन के लिए लोगों को टीकाकरण करवाने के लिए लोगों को स्वास्थ्य केंद्र लाने।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी को खिलाडी बनाओ के अलावा पर्यावरण संरक्षण में हरियाली नाम की संस्था बनाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करना और गांव व स्कूलों में विभिन्न प्रकार के हजारों पौधे रोपित करना संजीव कुमार का लक्ष्य बन चुका था। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमण के दौरान बंद पड़े स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो इसको लेकर वह जंगलों में मवेशियों को चरा रहे बच्चों को भी पढ़ाते नजर आए। उनके इस तरह के प्रयास को लेकर ही सरकार की तरफ से उन्हें सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाएगा।

पुरस्कार मिलने से स्वजनों व शिक्षकों में खुशी:

रियासी जिले के जोन पौनी में पढ़ते प्राइमरी स्कूल इखनी में तैनात शिक्षक संजीव कुमार शर्मा को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने की घोषणा के बाद शिक्षा विभाग, स्वजनों एवं क्षेत्रवासियों में बेहद खुशी है। शिक्षक संजीव कुमार शर्मा के पिता सेना से रिटायर्ड कैप्टन हैं। उनकी माता और पत्नी ग्रहणी हैं। उनके तीन भाई जिसमें दो शिक्षक और एक जम्मू कश्मीर आर्म्ड पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी है जो हमेशा अपने पिता के बताए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।
पहलवान से बन गए शिक्षक: शिक्षक संजीव कुमार शर्मा पेशे से पहलवान थे। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित दंगलों में अपनी कुश्तियां में दमखम दिखाने और शिक्षक बनने के बाद स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ पहलवानी के गुर भी सिखाए, जिसमें खासकर लड़कियों की खास भूमिका रही है। इसके अलावा स्कूलों में आयोजित होने वाले शिविरों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग में शिक्षक और बच्चों को जागरूक करने और बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में प्रेरित करने में भी उन्होंने अपनी खास भूमिका निभाई है।