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Lok Sabha Election 2019 : बर्फीले पहाड़ों में सुरंग खोलेगी राजनीतिक दलों के लिए द्वार, जानिए कैसे?

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सालभर बर्फ से ढके रहने वाले जोजिला दर्रे में चौदह किलोमीटर लंबा टनल बनाना सरकार के लिए जहां एक चुनौती बना हुआ है। वहीं राजनीतिक दलों के लिए भी चुनावों में यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे पूरा कर पाना उनके लिए भी आसान नहीं है। बार-बार टेंडर करने के बावजूद इस टनल को बनाने के लिए कंपनियां सामने नहीं आती है। यही कारण है कि इस बार के चुनावों में भी जोजिला टनल एक अहमद मुद्दा बना हुआ है।जोजिला टनल श्रीनगर को कारिगल और लेह के साथ सीधा जोड़ता है। एक बार इसका निर्माण हो जाने से यह क्षेत्र बारह महीने तक श्रीनगर व देश के अन्य हिस्सों से जुड़ा रहेगा। 17 अक्टूबर 2013 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने श्रीनगर-कारगिल-लेह मार्ग पर जोजिला दर्रे में 14.2 किलोमीटर लंबे टनल के निर्माण को मंजूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट पर तब 9090 करोड़ रुपये खर्च होने थे। अप्रैल 2013 के बाद इसके निर्माण के लिए चार बार ग्लोबल टेंडर हुए लेकिन कंपनियां चुनौतीपूर्ण हालात को देखते हुए आगे नहीं आईं। दिसंबर 2015 में 1050 करोड़ रुपयों से इस प्रोजेक्ट का निर्माण सरकार ने आइआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया था। उस समय एक ही टेंडर आया था, लेकिन इस मामले में सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के सरकार ने इसमें टेंडर की प्रक्रिया को भी बदला ताकि अधिक से अधिक कंपनियां इसमें भाग ले सकें। इसमें फाइनेंशियल बिड और टेक्निकल बिड को एक साथ किया गया, मगर फिर भी कोई लाभ नहीं हुआ। तीन जनवरी 2018 को आर्थिक मामलेां की कैबिनेट समित कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में फिर से इस टनल के निर्माण को मंजूरी दी। पिछले साल मई महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टनल के निर्माण के लिए नींव पत्थर भी रखा। दावा किया गया था कि दो तरफा यातायात की सुविधा वाली इस सुरंग का काम सात साल में पूरा हो जाएगा। मगर एक बार फिर से कंपनी ने इस सुरंग पर काम करना बंद कर दिया। इससे सुरंग बनने की उम्मीदें धुंधली हो गई। अब सरकार ने पिछले महीने सुरंग के निर्माण के लिए फिर से टेंडर बुलाए हैं।