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Jammu Kashmir: युवाओं की समस्याएं हल करने के लिए सरकार ने किया यह अहम प्रयास, यहा जाने

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जम्मू—कश्मीर सरकार की तरफ युवाओं के विकास में लगातार कई प्रयास या योनाएं चलाई जाती है! इसी कड़ी को आगे बड़ते हुए! एक बार फिर से जम्मू—कश्मीर सरकार की तरफ से युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने और उनकी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन ने जिला स्तर पर जिला युवा केंद्र (डीवाईसी) स्थापित करने का फैसला किया है। यह केंद्र मिशन युवा कार्यक्रम के तहत स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में जम्मू व कश्मीर संभाग के छह-छह जिलों में बनेंगे। इसके बाद शेष आठ जिलों में इन्हें स्थापित किया जाएगा।

रिलायंस फाउंडेशन, अशोक लेलैंड और टाटा समूह जैसे देश के प्रतिष्ठित व्यापारिक समूहों की भी इसमें मदद ली जा रही है। प्रस्तावित डीवाईसी में रोजगार सृजन, शिक्षा व कौशल विकास के साथ युवाओं को स्वरोजगार के लिए वित्तीय मदद जैसे मुद्दों को हल किया जाएगा। युवाओं में खेल व अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्हें सामाजिक व कैरियर सरोकरों से संबंधित मुद्दों पर काउंसिलिंग दी जाएगी। इन केंद्रों का मकसद 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं शैक्षिक, सामाजिक व मनोरंजक गतिविधियों के लिए सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराना है।
प्रदेश प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिलायंस समूह ने प्रदेश में स्पो‌र्ट्स लीग में निवेश करने में रुचि दिखाई है। टाटा समूह यहा सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने जा रहा है। बीएसई, आइसीआइसीआइ फाउंडेशन, अशोक लेलैंड के साथ समन्वय में बैंकिंग और बीमा समेत विभिन्न वित्तीय सेवाओं में युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। मुंबई स्थित पीरामल फाउंडेशन भी जम्मू कश्मीर प्रदेश प्रशासन के साथ शिक्षा क्षेत्र में काम कर रहा है।
अशोक लेलैंड भी इसी मिशन के तहत मुमकिन परियोजना पर प्रदेश प्रशासन के साथ काम कर रहा है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार 200 युवाओं को छोटे व्यावसायिक वाहन की खरीद के लिए 80 हजार रुपये की मदद कर रही है। इतनी ही राशि अशोक लेलैंड समूह प्रदान कर रहा है। जम्मू कश्मीर में मिशन युवा कार्यक्रम के कार्यकारी अधिकारी आबिद रशीद शाह के मुताबिक हमने छह क्षेत्रों को चिह्नित किया है।

इन क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं की बेहतरी के लिए प्रशासनिक मदद अथवा हस्तक्षेप की जरूरत है। डीवाईसी भी इसलिए बनाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि यह अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। यह पंरपरागत सरकारी कार्यालयों की तरह नहीं होंगे। यह एक तरह से यूथ क्लब होंगे, जहां लाईब्रेरी, थियेटर, आडिटोरियम, क्रिएटिव स्टूडियो, स्किल लैब भी होंगी। यह युवाओं के लिए युवाओं द्वारा संचालित किए जाएंगे। प्रशासन एक मददगार और संरक्षक की भूमिका में रहेगा।