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Jammu Kashmir: जानिये जम्मू—कश्मीर में इस बार कौन है श्रेष्ठ अस्पतालों की सूची में शामिल, मिला पहला स्थान

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नीति आयोग ने साल 2018-19 के लिए जम्मू कश्मीर के तीन जिला अस्पतालों को सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों में शामिल किया है। इसके लिए पहले से ही कुछ मानक निर्धारित किए गए थे। इन्हीं मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को श्रेष्ठ अस्पतालों की सूची में शामिल किया गया।
जिला अस्पताल बारामुला को सबसे बेहतर डायाग्नोस्टिक और सहयोगी सेवाओं के लिए पहने नंबर पर आंका गया है। इन सेवाओं के लिए जो मानक रखे गए थे, वह िलजा अस्पताल बारामुला ने पूरे किए। इसी तरह अस्पताल में सभी बिस्तरों पर मरीज भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल बांडीपोरा को पहले स्थान पर रखा गया। इस अस्पताल में सौ फीसद बिस्तरों पर मरीज भर्ती रहे। इसके अलावा जवाहर लाल नेहरू अस्पताल श्रीनगर को सीजेरियन सेक्शन में पहला किया जाए ताकि स्थान मिला। इस वर्ग में सामान्य प्रसव और सीजेरियन दोनों ही रखे हुए थे।
नीति आयोग ने कहा है कि इन तीनों अस्पतालों में जो सेवाएं दी जा रही हैं, उन्हें सूचीबद्ध किया जाए ताकि अन्य अस्पतालों में इस प्रकार की सेवाओं को शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल ढुल्लू ने तीनों अस्पतालों को पहले स्थान पर रखने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की सराहना की है।

बाल आश्रम अंबफला में रहने वाले बच्चों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण

बाल आश्रम अंबफला में रहने वाले बच्चों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हुए मेडिकल आफिसर डा. राजेंद्र थापा अपने सहयोगी के साथ दे रहे हैं। उसका मकसद सभी को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देकर जरूरतमंदों की जान बचाना है।कई सरकारी और निजी कंपनियों के स्टाफ सदस्यों को प्राथमिक उपचार पर प्रशिक्षण देने वाले डा. राजेंद्र थापा इस बाल आश्रम में पढ़ने वाले सभी 110 बच्चों को अब प्रशिक्षित करना चाहते हैं। इसमें उनका साथ शिरीन भी दे रही है।

डा. थापा का कहना है कि बहुत से लोगों को अगर समय पर प्राथमिक उपचार दे दिया जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन विडंबना यह है कि अभी भी जम्मू-कश्मीर में प्राथमिक उपचार को लेकर लोग प्रशिक्षित नहीं है। अगर विद्यार्थियों को स्कूलों में ही प्रशिक्षण दे दिया जाए इस समस्या का समाधान हो सकता है। यही सोच कर बाल आश्रम में पढ़ रहे बच्चों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हर रविवार को पच्चीस मिनट बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा।