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जम्मू संभाग में एक और बने संसदीय क्षेत्र, जानिए कहा से उठने लगी यह बड़ी मांग

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जम्मू संभाग में एक और संसदीय क्षेत्र बनाने की मांग उठने लगी है। हालांकि, 12 सदस्यी एक प्रतिनिधिमंडल आज यानि वीरवार को जम्मू में परिसीमन आयोग से भी अपनी बातों को रखने के लिए मिलेंगे। प्रतिनिधि मंडल में शामिल सदस्यों को इंसाफ मिलने की हैं काफी उम्मीदें भी हैं।दरअसल, जम्मू कश्मीर में पहली बार केंद्रीय कानून नियम के तहत परिसीमन होने जा रहा है। इसके चलते जम्मू संभाग के लोगों को परिसीमन में अभी तक हुए भेदभा व के दूर होने की काफी उम्मीदें हैं। दशकों से जम्मू संभाग क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से कश्मीर संभाग से बड़ा क्षेत्र होने के बावजूद सिर्फ दो संसदीय क्षेत्र बनाए गए हैं, जो इस बार के परिसीमन में जनप्रतिनिधि समेत आम लोग तीन होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि तभी राजनीतिक भेदभाव दूर होगा और लोगों की परेशानियां भी जल्द हल होंगी। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि जम्मू संभाग में तीन संसदीय क्षेत्र बनने चाहिए। इतना ही नहीं, विधान सभा क्षेत्रों में तो भी कई तरह की विसंगतियां हैं, जिसे अब दूर करने का सुनहरा मौका है, क्योंकि पहली बार परिसीमन पूरी पारदर्शित और बिना किसी राजनीति के दवाब से होने की उम्मीद है।
इससे पहले दो बार हुए परिसीमन में पूर्व की सरकारों ने अपनी मनमर्जी की। उनके अपने -अपने आयोग होते थे, ऐसा इसलिए कि जम्मू कश्मीर के पास अपना विशेष दर्जा था, जिसमें कोई भी केंद्रीय कानून यहां की विधान सभा के स्वीकृति के बिना सीधे लागू नहीं हो पाते, जिसका पूरा लाभ लेकर यहां की सरकारों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इंसाफ और कानून को ताक रखकर विधान सभा और संसदीय क्षेत्र बना लिए। इसके चलते राजनीतिक भेदभाव का जम्मू संभाग के लोग शिकार हुए और अब तक होते रहे हैं। ऐसे में अब मौका है कि केंद्रीय सरकार दशकों से इस भेदभाव को दूरकर जम्मू संभाग में विस और संसदीय क्षेत्र गठित करने में पाई गई विसंगितयां दूर कर सभी को राजनीतिक इंसाफ दे सकती है।
जेके डिलिमिटेशन फोरम का कहना है कि फोरम पिछले पांच वर्षो से तत्कालीन राज्यपाल, सलाहकार, आयोग के चेयरमैन, सदस्यों एवं मुख्य चुनाव आयुक्त के माध्यम से लिखित में ज्ञापन दे चुका है, अब भी मौजूदा परिसीमन आयोग से भेंट करने के लिए आवदेन किया गया है। फोरम की कठुआ जिला के पांच से छह विस क्षेत्र करने की शुरू से ही मांग रही है। इसमें बिलावर, बसोहली के कुछ कठुआ और हीरानगर विधान सभा क्षेत्र के साथ जोड़े गए गांवों को विधान सभा व प्रशासनिक मुख्यालय के साथ जोड़ने की मांग है। कुछ विस क्षेत्र 40 हजार मतदाताओं की संख्या वाले तो कुछ एक लाख की संख्या के भी हैं, इस तरह की विसंगति को भी दूर करने की मांग शामिल है।
बहरहाल, पीडीपी के जिला प्रधान जगदीप सिंह एवं महासचिव विनोद गुप्ता ने कहा कि जिला कठुआ से उनकी पार्टी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता आयोग से मिलने नहीं जाएगा। उनकी पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती द्वारा बहिष्कार किए जाने के चलते ऐसा फैसला लिया गया है। अगर किसी ने डीसी कार्यालय में उनकी पार्टी का नाम लेकर आयोग से मिलने के लिए आवेदन किया है तो वो स्वयंभू हो सकता है, उनकी पार्टी का नहीं,उनका पार्टी का बहिष्कार है।