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हिंदी भाषा पर देश में हो रही पॉलिटिक्स: रजनीकांत ने भी दी टिप्पणी

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भारत एक ऐसा देश हैं, जहां हर शहर नहीं, बल्कि हर गांव, हर ज़िले के साथ भाषा बदल जाती है। विभिन्न सभ्यता, संस्कृति के साथ भारत में लगभग 780 भाषाएं बोली जाती हैं। भारत में 22 भाषाओं को आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है। जबकि मुख्य रूप से यहां सरकारी कामकाज की दो ही भाषा है, हिंदी व अंग्रेजी। भारत में सबसे ज़्यादा बोलने वाली भाषा हिंदी है।

पिछले कुछ दिनों से हिंदी भाषा को लेकर देश में काफी पॉलिटिक्स हो रहा है। दरअसल हिंदी दिवस के दिन गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा था कि आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं देश के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रयोग को बढाएं और साथ में हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर देश की एक भाषा के पूज्य बापू और लौह पुरूष सरदार पटेल के स्वप्प्न को साकार करने में योगदान दें। भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परन्तु पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है।

उनकी यह बात तूल पकड़ती जा रही है। एक ओर विपक्षी दल जहां इसका जम कर विरोध कर रहे हैं और वहीँ बीजेपी के नेता भी विरोध करने में पीछे नहीं रहे। ट्विटर पर भी इस बयान पर काफी हलचल देखी गयी। ज्यादा विरोध के सुर दक्षिण भारत से सुनाई दे रही है। कई दिग्गजों की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद अब नेता से अभिनेता बने रजनीकांत ने भी अमित शाह के इस ‘वन नेशन, वन लैंग्वेज’ का विरोध किया है।

‘वन नेशन, वन लैंग्वेज’ का विरोध करते हुए फिल्म अभिनेता रजनीकांत ने कहा कि हिंदी भाषा को किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। सिर्फ तमिलनाडु नहीं दक्षिण का कोई भी राज्य हिंदी को स्वीकार नहीं करेगा। सिर्फ हिंदी ही नहीं। किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए। इससे पहले अभिनेता से नेता बने कमल हसन ने भी इस पर बयान दिया था।