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सूर्य पुत्री तवी नदी में काफी धूमधाम से बप्पा को किया गया विसर्जित, जानिए क्यों किया जाता है विसर्जन

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गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी का आगमन होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा भक्तों से विदा होकर अपने लोक लौट जाते हैं। इस तरह हर साल गणेश उत्सव 10 दिनों का होता है। लोग दस दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति से बप्पा की पूजा अर्चना करते हैं और आखरी दिन में काफी धूमधाम से विसर्जन करते हैं। वहीँ कल जम्मू में भी लोगों ने गणपति बप्पा को विदा कर उत्सव को संपन्न किया। इस दौरान लोगों में काफी उत्साह देखा गया और वह सब ढोल नगाड़े की ताल पर नाचते नज़र आए। छोटे छोटे बच्चे भी बप्पा के विसर्जन के लिए तवी नदी में पहुंचे। ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ जेयगोष से पूरा वातावरण गूँज उठा और श्रद्धालु गुलाल से रंगे नज़र आए।

काफी लोग ऐसे होंगे जिन्हें यह नहीं पता होगा कि आखिर देवी देवताओं का विसर्जन क्यों किया जाता है। वेदों में कहा गया है कि सभी देवी-देवता मंत्रों से बंधे हैं उन्हें मंत्रों के द्वारा अपने लोक से बुलाया जाता है। जिन प्रतिमा को स्थापित करके मंत्रों द्वारा उनमें प्राण प्रतिष्ठा डाली जाती है वही प्रतिमा देव रूप होती है और उन्हीं का विसर्जन किया जाता है।

विसर्जन का नियम इसलिए है कि मनुष्य यह समझ ले कि संसार एक चक्र के रूप में चलता है भूमि पर जिसमें भी प्राण आया है वह प्राणी अपने स्थान को फिर लौटकर जाएगा और फिर समय आने पर पृथ्वी पर लौट आएगा। विसर्जन का अर्थ है मोह से मुक्ति, आपके अंदर जो मोह है उसे विसर्जित कर दीजिए। आप बप्पा की मूर्ति को बहुत प्रेम से घर लाते हैं उनकी छवि से मोहित होते हैं लेकिन उन्हें जाना होता है इसलिए मोह को उनके साथ विदा कर दीजिए और प्रार्थना कीजिए कि बप्पा फिर लौटकर आएं, इसलिए कहते हैं गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

गणपति विसर्जन का दिन ढलने के बाद तवी नदी का नज़ारा काफी बुरा देखा गया क्योंकि जहाँ नज़र पड़ रही थी वहां केवल पॉलिथीन, प्लास्टिक बॉटल्स, चुन्नियाँ और गंदगी दिख रही थी। इसे देख कर काफी दुःख हो रहा था कि एक तरफ लोग बप्पा को विसर्जित करने आए हैं और वहीँ दूसरी ओर जम्मू की सूर्य पुत्री को दूषित कर रहे हैं।