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शिक्षक दिवस पर इन शिक्षकों को याद करना ना भूलना

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भारत में हमेशा से शिक्षकों को काफ़ी एहमियत दी गयी है चाहे वह अंग्रेज़ों से पूर्व भारत की हो या अब के। तरक्की होने के कारण हमारी शिक्षा में भी काफ़ी बदलाव आये हैं जैसे की अब पढ़ाई के तरीके भी मॉडर्न हो गए हैं जो की पहले आश्रम के तरीके तक ही सीमित थे। लेकिन इसके बीच गुरु-शिष्य के संबंधों को मनाने की परंपरा काफी पुरानी रही है। बहरहाल, व्यवस्था चाहे नई हो या पुरानी – भारत में हमेशा महान शिक्षक हुए हैं। ऐसे शिक्षक जिनके कार्य न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया को आज भी राह दिखा रहे हैं।

शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर हम आपको कुछ ऐसे महान भारतीय शिक्षकों के बारे में बताएंगे जिनका योगदान हमारे जीवन में भी कहीं न कहीं झलकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि हमारे जीवन में उनका योगदान कैसे, तो बहुत सरल सी बात है कि उनके द्वारा दिया गया ज्ञान कहीं न कहीं हमारे पूर्वजों द्वारा उस ज्ञान का संचार अब की पीड़ी तक चला आ रहा है।

जब भी भारत के महान शिक्षकों की चर्चा होती है तो उसमें चाणक्य का नाम जरूर लिया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक चाणक्य का काल ईसा पूर्व 375 – 225 माना जाता है। वे इतिहास में ‘कौटिल्य’ नाम से भी विख्यात हैं। चाणक्य के द्वारा रचित ‘अर्थशास्त्र’ राजनीति, कृषि, समाजशास्त्र आदि का महान ग्रंथ माना जाता है।
प्राचीन भारत के कई ग्रंथ चाणक्य की प्रशंसा से भरे पड़े हैं। चाणक्य अपने समय के प्रसिद्ध विद्वान थे। उनके समय में गुरुकुल व्यवस्था थी और गुरु-शिष्य की परंपरा का निर्वहन किया जाता था। गौरतलब है कि मगध साम्राज्य से अपमान का बदला लेने के लिए चाणक्य ने अपने एक शिष्य को कुछ इस तरीके तैयार किया कि कालांतर में उस शिष्य ने प्राचीन भारत के एक महान साम्राज्य की नींव रखी। इतिहास में चाणक्य का शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

चाणक्य ऐसे प्राचीन शिक्षक हैं जो भारत की रचनात्मक बुद्धि के प्रतीक माने जा सकते हैं। उनकी कई नीतियां आज भी प्रासंगिक बनी हुई हैं। चाणक्य का अर्थशास्त्र शायद दुनिया का पहला ऐसा ग्रंथ है जिसमें एक राज्य को लेकर बहुत सारी व्याख्याएं की गईं हैं।

रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। मां काली के परम भक्त श्री परमहंस प्रेममार्गी भक्ति के समर्थक थे। उन्हीं की शिक्षा और ज्ञान से स्वामी विवेकानंद ने दुनिया में हिंदू धर्म की पताका फहराई।

19वीं सदी के महान भारतीय गणितज्ञ और शिक्षक श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर, 1887 को हुआ था। रामानुजन मॉडर्न इतिहास के दुनिया के बड़े मैथमेटिशियन में शुमार किए जाते हैं। रामानुजन का छोटी उम्र में ही निधन हो गया था लेकिन भारत के इस महान गणितज्ञ ने अपने छोटे जीवनकाल में गणित के लगभग 3,000 से ज्यादा सूत्रों और प्रमेयों का संकलन किया। दुनियाभर में रामानुजन के कई गणितीय परिणामों पर आज भी रिसर्च किया जा रहा है।

भारत में कईं ऐसे अध्यापक हुए हैं जिनका काफी योगदान रहा है लेकिन बहुत कम लोग उन्हें आज के युग में जानते हैं। उन्ही में एक पहली महिला अध्यापक भी हैं जिनका नाम सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले है जो ना केवल एक अध्यापिका थी बल्कि कवयित्री, वंचितों की आवाज़ उठाने वाली और समाजसेविका भी थी। इनके बारे में अभी भी काफी लोग नहीं जानते जहाँ तक की बहुत सारी महिलाएं भी नहीं जानती कि अगर आज वो शिक्षित हैं तो किसके प्रयासों के चलते है। सावित्रीबाई ज्‍योतिराव फुले को भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन की एक अहम शख्सियत माना जाता है।

बताया जाता है कि जब वह स्कूल जाती थीं, तो लोग उन्हें पत्थर मारते थे। उन पर गंदगी फेंक देते थे। सावित्रीबाई ने उस दौर में लड़कियों के लिए स्कूल खोला जब बालिकाओं को पढ़ाना-लिखाना सही नहीं माना जाता था। उनका पूरा जीवन समाज के वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता।
उनकी एक बहुत ही प्रसिद्ध कविता है जिसमें वह सबको पढ़ने- लिखने की प्रेरणा देकर जाति तोड़ने और ब्राह्मण ग्रंथों को फेंकने की बात करती थीं।

जाओ जाकर पढ़ो-लिखो, बनो आत्मनिर्भर, बनो मेहनती
काम करो-ज्ञान और धन इकट्ठा करो
ज्ञान के बिना सब खो जाता है, ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है
इसलिए, खाली ना बैठो,जाओ, जाकर शिक्षा लो
दमितों और त्याग दिए गयों के दुखों का अंत करो, तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौका है
इसलिए सीखो और जाति के बंधन तोड़ दो, ब्राह्मणों के ग्रंथ जल्दी से जल्दी फेंक दो।

ऐसा ही भारत में कईं शिक्षक हुए हैं जिनमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, ज़ाकिर हुसैन,’मिसाइल मैन’ कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, आदि। इनके योगदान समाज के लिए जितने गिनाए जाए उतने ही कम हैं क्योंकि इन्होंने देश सेवा के साथ साथ लोगों को भी शिक्षित करने के लिए अहम भूमिका निभाई है। किसी ने सच कहा है कि शिक्षक एक दिया की तरह होता है जो खुद जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।