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मोदी सरकार के संकटमोचक के निधन के बाद देश में शोक की लहर, जम्मू कश्मीर से है गहरा संबंध

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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया। जेटली के निधन का समाचार पाकर देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। वह 66 साल के थे। जेटली की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी और शुक्रवार को उनकी तबियत काफी ज़्यादा बिगड़ गयी थी।

अरुण जैटली को सांस लेने में दिक्कत और बैचैनी की शिकायत के बाद 9 अगस्त को एम्स लाया गया था। बता दें कि किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके जेटली को कैंसर हो गया था जिसके बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।

28 दिसंबर 1952 में नई दिल्ली में उनका जन्म हुआ था। अरुण जेटली की स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट जेवियर स्कूल से हुई। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री ली और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही लॉ की डिग्री हासिल की।

छात्र जीवन में ही भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय, कार्पोरेट मामले के मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कानून मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय संभाला। वे जहां भी रहे, सराहना हासिल करते रहे। वे 1991 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने और अपनी खराब सेहत के चलते उन्होंने सक्रिय राजनीति से खुद को दूर कर लिया था। हालांकि, वह राज्यसभा के सदस्य थे।

जेटली भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। उन्होंने वित्त और रक्षा विभागों को संभाला और कई बार सरकार के मुख्य संकटमोचक के रूप में कार्य किया इसलिए उन्हें मोदी सरकार का संकटमोचक कहा जाता है।

अरुण जेटली का जम्मू कश्मीर से एक गहरा संबंध है। उनकी शादी जम्मू कश्मीर के गिरधारी लाल डोगरा की बेटी से हुई थी। गिरधारी लाल जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य थे। देश का हर नेता उनके निधन की खबर सुनकर दुख व्यक्त कर रहा है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर कहा, ‘‘जेटली के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। वे गजब के वकील, सुलझे हुए सांसद और उत्कृष्ट मंत्री थे। देश को बनाने में उन्होंने अहम योगदान दिया। उनके जाने से राजनीति और बुद्धिजीवियों की दुनिया में एक खालीपन आ गया है।’

नरेंद्र मोदी ने अरुण जेटली को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “अरुण जी महान राजनेता थे। बुद्धिजीवी होने के साथ उन्हें कानूनी महारत प्राप्त थी। मैंने जेटली जी की पत्नी संगीता और बेटे रोहन से बातचीत कर संवेदनाएं प्रकट की हैं। अरुण जी में गंभीरता और विनोदप्रियता का अनूठा संगम था। समाज के हर वर्ग में लोग उन्हें चाहते थे। संविधान, इतिहास, सार्वजनिक नीति और प्रशासन की उन्हें गहरी समझ थी। केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने कई जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। देश की आर्थिक उन्नति में योगदान दिया, सुरक्षा को मजबूत किया और ऐसे कानून बनाने में महती भूमिका निभाई जो जनता के लिए सहूलियत वाले हों। भाजपा से उनका अटूट रिश्ता रहा। आपातकाल में वो छात्र नेता के तौर पर सक्रिय रहे। उनके निधन से मैंने एक अमूल्य मित्र खो दिया है। ये मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने उनके साथ कई दशकों तक काम किया। वे सदा हमारे दिलों में रहेंगे। ओम शांति…।”

वहीँ केंद्र गृह मंत्री अमित शाह ने कहा ,”अरुण जेटली जी के निधन से अत्यंत दुःखी हूँ, जेटली जी का जाना मेरे लिये एक व्यक्तिगत क्षति है। उनके रूप में मैंने न सिर्फ संगठन का एक वरिष्ठ नेता खोया है बल्कि परिवार का एक ऐसा अभिन्न सदस्य भी खोया है जिनका साथ और मार्गदर्शन मुझे वर्षो तक प्राप्त होता रहा।”