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भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का सख्त रवैया, 22 अफसरों को जबरन किया रिटायर

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मोदी सरकार का रवैया भ्रष्टाचार पर काफी सख्त है। यही सख्ती अब सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के 22 अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिखाई है। जिन 22 अधिकारियों को सेवानिवृत्त किया गया है वह अधीक्षक और एओ रैंक के हैं। इन्हें जनहित के मौलिक नियम 56 (जे) के तहत सेवानिवृत्त किया गया है। सभी पर भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जिसके कारण यह फैसला लिया गया।

इन अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि कर प्रशासन में मौजूद कुछ कर्मचारियं ने ईमानदार आकलन करने वालों को निशाना बनाकर या मामूली प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए अत्यधिक कार्रवाई करके अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके करदाताओं को परेशान किया है।

उन्होंने कहा था कि सरकार ने हाल ही में कुछ कर अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था और इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले जून में सरकार ने 27 वरिष्ठ भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था। जिसमें केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के 12 अधिकारी भी शामिल थे।