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नागरिकता संशोधन विधेयक अगले सप्ताह लोकसभा में पेश होगा

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नागरिकता संशोधन विधेयक अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किया जाएगा और छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन को संसद की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी थी। हालांकि कई विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में अगले सप्ताह के प्रस्तावित विधेयकों में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 का भी उल्लेख किया। सूत्रों के अनुसार इस विवादास्पद विधेयक को अगले सप्ताह निचले सदन में पेश किया जा सकता है। हालांकि नया कानून असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय , मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में लागू नहीं होगा। विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में पहले व्यापक प्रदर्शन हो चुके हैं। इस विधेयक में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर मुसलमानों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। लोकसभा में पारित होने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जायेगा । यह विधेयक लोकसभा में आसानी से पारित होने के आसार हैं क्योंकि निचले सदन में भाजपा को बड़ा बहुमत है। राज्यसभा में भी गंभीर अवरोध के आसार कम हैं क्योंकि अतीत में सरकार को कुछ विवादास्पद विधेयकों पर बीजद, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों का समर्थन मिला था। गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के शीर्ष नेताओं ने इस विषय पर राजनीतिक दलों एवं पूर्वोत्तर के नागरिक समूहों से व्यापक चर्चा की है और उनकी चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और बसपा सहित कुछ विपक्षी दलों ने इसकी तीखी आलोचना की है। नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर विरोध जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बुधवार को कहा कि इससे संविधान का मूलभूत सिद्धान्त कमतर होता है।(यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स.कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है।