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तीन साल के निचले स्तर पर पहुंची थोक महंगाई दर, 0.16 पर रहा सूचकांक

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थोक महंगाई दर तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर महीने में थोक महंगाई दर 0.16 फीसदी दर्ज की गई। इससे पहले सितंबर माह में थोक महंगाई दर 0.33 फीसदी रही थी। खाद्य उत्पादों विशेषकर प्याज-टमाटर की कीमतों में उछाल होने की वजह से थोक महंगाई दर सूचकांक शून्य से नीचे नहीं गया।
आंकड़ों के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में -0.84 फीसदी महंगाई दर रही। यह सितंबर माह में -0.42 फीसदी रही थी। यह इसलिए हुआ, क्योंकि मांग में कमी के चलते कई फैक्ट्रियों में उत्पादन काफी कम हो गया है। वो पहले से तैयार माल को डिस्काउंट पर बेच रहे हैं।

कोर थोक महंगाई दर -1.16 फीसदी रही, जो सितंबर माह में -1.1 फीसदी रही थी। कमोडिटी उत्पादों की कीमतों में कमी के चलते ऐसा देखने को मिला है।

हालांकि खाद्य उत्पादों में महंगाई दर में इजाफा देखने को मिला। यह अक्तूबर माह में 9.8 फीसदी रही, जो कि सितंबर माह में 7.47 फीसदी रही थी। बिजली और उर्जा में महंगाई दर पिछले माह के -7.05 फीसदी के मुकाबले अक्तूबर माह में -8.27 फीसदी रही है।
खुदरा महंगाई दर 16 माह के उच्चतम स्तर पर
प्याज, टमाटर सहित खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से अक्तूबर में खुदरा मूल्य आधारित महंगाई (सीपीआई) के मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है। इस महीने में सीपीआई बढ़कर 4.62 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। जुलाई, 2018 के बाद ऐसा पहली बार है, जब रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4 फीसदी के मध्यावधि लक्ष्य से ऊपर सीपीआई पहुंची है। वहीं सितंबर, 2019 में यह 3.99 फीसदी और अक्तूबर, 2018 में यह 3.38 फीसदी के स्तर पर रही थी।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाद्य बास्केट में शामिल उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी रही जिसमें अक्तूबर, 2019 में 7.89 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि सितंबर, 2019 में यह आंकड़ा 5.11 फीसदी रहा था।

अक्तूबर में सब्जियों की कीमतों में 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पिछले महीने यह आंकड़ा 15.4 फीसदी रहा था। वहीं दालों की कीमतों में 11.72 फीसदी की बढ़त रही, जबकि सितंबर में यह 8.4 फीसदी महंगी हुई थीं। अक्तूबर में अनाज की महंगाई 2.16 फीसदी रही, जबकि सितंबर में यह 1.66 फीसदी रही थी।