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झारखंड के गिरिडीह में बोले शाह- मोदी और रघुबर ने नक्सलवादियों को 20 फुट नीचे दबाया

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह चौथी बार झारखंड पहुंच गए हैं। गिरिडीह में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे झारखंड के अंदर जनता तय करके बैठी है कि इस बार फिर नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कमल के फूल की सरकार बनानी है और झारखंड को विकास के पथ पर ले जाना है। कमल पर दिया गया एक-एक वोट झारखंड को विकास और प्रगति की ओर ले जाएगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड में आज जो गठबंधन सामने है वो राजनीतिक फायदा उठाने वाला है। मैं हेमंत जी को पूछना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री बनने के लिए जिस कांग्रेस की गोद में बैठकर आए हो, झारखंड के युवाओं पर गोली चलाने वाली वह ही कांग्रेस थी। जिस झारखंड को अटल जी ने बनाया, उस झारखंड में रघुबर दास और नरेंद्र मोदी जी की जोड़ी ने झारखंड को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का काम किया है।

नक्लसवाद का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि जिस झारखंड के अंदर नक्सलवादियों का नंगा नाच दिखाई पड़ता था आज मैं कहने आया हूं कि नरेंद्र मोदी जी और रघुबर दास जी ने नक्सलवादियों को 20 फुट जमीन के नीचे दबाने का काम किया है। मुझे बताओ माताओं-बहनों और युवाओं! नक्सलवाद के रहते झारखंड का विकास हो सकता है क्या? हेमंत सोरेन और कांग्रेस की सरकार नक्सलवाद को रोक सकती है क्या? नक्सलवाद को केवल और केवल हमारे नेता नरेंद्र मोदी जी ही रोक सकते हैं।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा को जब-जब मौका मिला, झारखंड को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां से थैले के थैले भरकर दिल्ली के दरबार में रुपया ले जाते थे, जो रुपया मेरे झारखंड के गरीब युवाओं के विकास के लिए था। 70-70 साल तक कांग्रेस की सरकार रही, गरीबों के घर में बिजली नहीं आती थी, आदिवासियों, पिछड़ा समाज, दलितों के घर में बिजली नहीं आती थी, आज इस विधानसभा के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का काम नरेंद्र मोदी और रघुबर दास ने पूरा कर दिया।

उन्होंने कहा कि 70 साल राहुल बाबा की पार्टी ने शासन किया। इनकी पार्टी ने चार-चार पीढ़ी तक शासन किया, मगर गरीब माताओं-बहनों, गरीब बेटियों के लिए शौचालय उपलब्ध कराने का काम नहीं किया। गरीब घर की माताओं, बेटियों को खुले में कुदरती प्रक्रिया के लिए जाना पड़ता था।ग रीब का घर, उसकी रसोई धुएं से भरी होती थी। गरीब मां चूल्हा फूंक-फूंककर खाना पकाती थी, उसकी नेत्र की ज्योति चली जाती थी, फेफड़े धुएं से भर जाते थे, फाइब्रोसिस हो जाता थी, मां बेचारी 50 साल में ही बुढ़िया दिखने लगती थी।