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जम्मू-कश्मीर में पंचायतों को ताकतवर बनाने के लिए केंद्र देगा 3,700 करोड़ रुपये

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जम्मू और कश्मीर में पंचायतों को ज्यादा ताकतवर बनाने और स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार गंभीर है। केंद्र जम्मू-कश्मीर में पिछले साल निर्वाचित हुईं ग्राम पंचायतों के खाते में डायरेक्ट 3,700 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की योजना बना रहा है। इसमें से करीब 1,800 करोड़ रुपये कश्मीर में विकास कार्यों और लोककल्याण के अन्य कामों के लिए पंचायतों को दिए जाएंगे।

700 करोड़ रुपये पहले ही जारी हो चुके हैं
सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित पंचायतों/स्थानीय निकायों को 3,700 करोड़ रुपये दिए जाने हैं, जिनमें से 700 करोड़ रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। इस राशि के उपयोग की समीक्षा के बाद केंद्र 2 किस्तों में अतिरिक्त 1,500-1500 करोड़ रुपये जारी करेगा।

एक अधिकारी ने बताया, ‘जम्मू-कश्मीर में पिछले साल काफी इंतजार के बाद हमने पंचायत चुनाव कराया। उससे पहले तक जमीनी स्तर पर ये फंड नहीं पहुंच पा रहे थे। आखिरकार राज्यपाल शासन के तहत पंचायत चुनाव संपन्न हुए, जिसके बाद विकास कार्यों के लिए निर्वाचित सरपंचों को सीधे फंड ट्रांसफर हो पा रहे हैं।’

फंड कहां खर्च हो रहा, इसकी निगरानी कर रहे अफसर
गृह मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ग्राम पंचायतों को ट्रांसफर किए गए फंड का 10 फीसदी प्रशासनिक जरूरतों पर खर्च के लिए दिया गया है, जबकि 90 प्रतिशत फंड स्थानीय लोगों के हित में इस्तेमाल होगा। केंद्र द्वारा भेजे पैसों का ग्राम पंचायतें सही से उपयोग करें, यह सुनिश्चित करने के लिए ‘बैक टु विलेज’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत क्लास 1 ऑफिसर गांवों में जाते हैं और सरपंचों व दूसरे लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। साथ ही साथ ऑफिसर फंड के उपयोग पर भी नजर रखते हैं।

पंचायतों को सशक्त बना अलगाववादियों को अलग-थलग करने की रणनीति
दरअसल, केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पंचायतों को सशक्त बनाकर अलगाववादियों को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी के तहत केंद्र पहले ही जम्मू-कश्मीर के करीब 40 हजार स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों की वित्तीय शक्तियों में 10 गुना इजाफा कर चुका है। अब पंचायत प्रतिनिधि को 10,000 की जगह 1 लाख रुपये रुपये तक के विकास कार्य के लिए कहीं और से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। इसी तरह ब्लॉक काउंसिल्स के प्रतिनिधि 25,000 की जगह 2.50 लाख तक के विकास कार्य करा सकेंगे। इसके अतिरिक्त पंचायतों को तमाम सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के चयन का भी अधिकार है। नैशनल हेल्थ मिशन, समग्र शिक्षा जैसी प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पंचायतों को सालाना 50 से 80 लाख रुपये मिलते हैं।