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जम्मू-कश्मीरः इंटरनेट बंद होने से पुस्तकालयों में बढ़ी युवाओं की संख्या, खेल मैदान भी गुलजार

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अनुच्छेद 370 हटने के बाद नए जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच महीने से मोबाइल इंटरनेट बंद होने से बच्चों और युवाओं की दुश्वारियां तो बढ़ी हैं, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि उनके स्वभाव में बदलाव आया है। अभिभावकों की मानें तो वे परिवार में अधिक समय देने लगे हैं। माता-पिता, भाई-बहन के साथ समय बिताने लगे हैं। खेल के मैदान भी गुलजार हुए हैं।
सार्वजनिक पुस्तकालयों से दूर युवा अब वहां भी पहुंचने लगे हैं। इनकी तादाद में लगभग दस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से एडिक्ट बच्चों को शहर के साइक्रेटिक अस्पताल में परामर्श के लिए अभिभावक ले जाते थे, लेकिन अब ऐसे बच्चों की संख्या लगभग नहीं के बराबर रह गई है।

अमर उजाला ने शहर के विभिन्न सार्वजनिक पुस्तकालयों और खेल मैदानों का दौरा किया। पाया कि शहर में स्थित सरकारी और निजी पुस्तकालयों में युवाओं के साथ ही बुजुर्गों के पहुंचने का सिलसिला इंटरनेट बंद होने के बाद बढ़ा है।

गांधीनगर में एक निजी पुस्तकालय की सहायक तरनजीत कौर ने बताया कि पुस्तकालय में पहले 50-60 लोग आते थे। अब प्रतिदिन 100 के आसपास लोग पहुंच रहे हैं। लगता है कि इंटरनेट बंद होने से एक बार फिर से किताबें पढ़ने का चलन लौटने लगा है। गांधीनगर में ही संचालित एक अन्य पुस्तकालय की पुस्तकालय सहायक शिवानी ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं ठप होने के बाद आने वालों की संख्या में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।