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गरीब की किडनी दो लाख में खरीदकर २२ लाख में बेचता था गिरोह

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किडनी कांड में १६ नाम सामने आने के बाद अब तक १० लोगों को जेल भेजा जा चुका है। इस केस का खुलासा करने वाले एसआईटी के अफसरों ने बताया है कि किडनी का सौदा करने वाला गिरोह डेढ़ से दो लाख में किडनी खरीदकर २० से २२ लाख तक में बेचता था। ये लोग आदमी की हैसियत देखकर सौदा करते थे। किसी से लाखों में सौदा होता था तो किसी से करोड़ों रुपए तक लिए जाते थे। जबकि डोनरों को इसमें से मामूली रकम ही दी जाती थी।
प्रत्यारोपण कराने वाले भी निशाने पर
इस मामले की जांच अब किडनी लेने वालों पर आकर टिकी है। अब तक ये लोग बड़े कारोबारी, ठेकेदार, अभियंता और नेताओं की किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके हैं। एसआईटी जल्द ही अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोगों से भी पूछताछ करेगी। एक मामले में रईस अहमद ने जिस ठेकेदार कमल सिंह चौहान को भांजा ब्रजेंद्र पाल सिंह बनकर किडनी दी थी, ट्रांसप्लांट के कुछ ही दिनों बाद उसकी मौत हो गई थी। अफसरों की मानें तो ठेकेदार ने किडनी के लिए एक करोड़ रुपए दिए थे।
मजबूरी का उठाते फायदा
गिरोह के सदस्य पूरे देश में फैले हैं और वे डोनरों को फुसलाकर दिल्ली ले जाते थे। सीओ सैफुद्दीन ने बताया कि वरदान को गिरोह के सदस्यों ने सवा तीन लाख रुपए दिए थे और बाद में अटैची का ताला काटकर ये रुपए निकाल लिए गए। प्रत्यारोपण के बाद उसके पास घर लौटने तक का पैसा नहीं था, तो इन्हीं लोगों ने उसे 600 रुपए दिए। यह गिरोह गरीबों को फंसाता था। कई मामलों में डोनर को एक से डेढ़ लाख में ही पटा लेते थे। दिल्ली ले जाकर अंग निकालने के बाद छोड़ देते थे। फिर वह परेशान होकर जो मिलता, लेकर लौट जाता था।
जांच में १६ नाम, १० गए जेल
किडनी कांड की जांच में सुनीता, सिप्पू राय, आसिम सिकंदर, संजय पाल, डॉ. केतन कौशिक, संजय पांडेय, मिथुन, आनंद, अरविंद, राजा उर्फ मोहम्मद उमर, रामू पांडेय, शमशाद अली, सबूर अहमद, विक्की सिंह, शैलेश सक्सेना और गौरव मिश्रा के नाम सामने आए हैं। जांच के लिए पहले बनी एसआईटी टी राजकुमार राव, गौरव मिश्रा, दिल्ली के बदरपुर निवासी शैलेश सक्सेना, लखनऊ के काकोरी निवासी सबूर अहमद, पनकी गंगागंज निवासी विक्की सिंह और लखनऊ विक्टोरिया स्ट्रीट निवासी शमशाद अली को गिरफ्तार किया था। श्याम, राजा उर्फ मोहम्मद उमर, रामू पांडेय और गुलाम जुनैद अहमद खान को भी जेल भेजा जा चुका है।
लचर पैरवी से बच गया सरगना
सरगना टी राजकुमार राव पहले बनी एसआईटी की लचर पैरवी के चक्कर में जमानत पर छूट चुका है। 27 मई को हाईकोर्ट ने उसे सशर्त जमानत दी थी। गौरव मिश्र की जमानत भी मंजूर हो चुकी है। इसी तरह पूर्व की एसआईटी ने पीएसआरआई अस्पताल की कोऑर्डिनेटर सुनीता प्रभाकरन व मिथुन का नाम पूरे फर्जीवाड़ा में प्रमुखता के साथ उजागर किया था। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। ये दोनों पुलिस की लापरवाही का फायदा उठा कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले आए हैं।