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कश्मीर में सर्दी में 2000-2100 मेगावाट लोड की होगी डिमांड, बर्फबारी से निपटने के लिए हुई बैठक

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पीडीडी अभी तक हुए नुकसान का आंकलन करे। खराब मौसम के मद्देनजर आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी की जाए। यह बात उपराज्यपाल के सलाहकार केके शर्मा ने विद्युत विकास विभाग (पीडीडी) के अधिकारियों के साथ एक व्यापक पोस्ट- स्नोफाल पर समीक्षा बैठक में कही। साथ ही अधिकारियों को चुनौतियों से सबक सीखने और अग्रिम रूप से तैयार रहने के लिए निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से सीखने को मिलता है। आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी जानकारी मिलती है। सबको चुनौतियों और विफ लताओं से सीखकर आगे की योजना बनानी चाहिए। इससे पहले अधिकारियों ने बैठक में बताया कि ग्रीष्मकाल के दौरान पीडीडी ने सिस्टम की कमी के साथ बहुत कम स्थानीय क्षेत्रों के सिवाय मीटर और बिना मीटर वाले दोनों उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की है। औसतन, विभाग 1200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति कर रहा है।

जलवायु में परिवर्तन के साथ विभाग को बढ़े हुए लोड की आपूर्ति की चुनौती का सामना करना पड़ा। मुख्य अभियंता पीडीडी (वितरण) कश्मीर हशमत काजी ने बताया कि वर्तमान में शाम के समय प्राइम घंटे के दौरान लगभग 1750 मेगावाट का पीक लोड का सामना किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस सर्दी में विभाग को 2000-2100 मेगावाट बिजली की डिमांड रहेगी। मुख्य अभियंता पीडीडी (ट्रांसमिशन) ऐजाज अहमद डार ने बताया कि जैनाकोट-एलेस्टैंग ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के तहत हाल ही में हुई बर्फबारी में 10 महत्वपूर्ण टावरों को आंशिक रूप से क्षति हुई। बताया कि युद्धस्तर पर फिर से काम करने के लिए व्यापक आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं। इसी तरह 132 केवी बदामपोरा-बांदीपोरा लाइन टावरों को भी क्षति पहुंची और क्षतिग्रस्त टावरों की मरम्मत या शेष कार्य के बाद लाइन का काम फिर से शुरू होगा।