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एकता और इंसानियत का प्रतीक बना श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित नगर कीर्तन

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भारत, एक ऐसा देश यहाँ कईं धर्मों के लोग निवास करते हैं चाहे वो हिन्दू हों , मुस्लिम हों, सिख हों या अन्य धर्म के। सब लोग अन्य धर्मों के त्योहारों व् कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं। ऐसा ही हमें देखने को मिला भारत पाक विभाजन के बाद पहली बार श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर निकाले जाने वाले अंतराष्ट्रीय नगर कीर्तन में। यह नगर कीर्तन गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब पाकिस्तान से एक अगस्त को निकाला गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और सबसे अनोखी बात यह देखने को मिली कि इस नगर कीर्तन में ना केवल सिख समुदाय के लोग या हिन्दू शामिल हुए बल्कि ननकाना साहिब के मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हुए। यह इंसानियत के लिए एक साम्प्रदायिकता और भाईचारे की सबसे बड़ी मिसाल है।

आपको बता दें कि ननकाना साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में एक शहर और ननकाना साहिब ज़िले की राजधानी है। यह सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के नाम पर है। गुरु नानक देव जी का जन्म इसी शहर में हुआ था और पहली बार उन्होंने यहाँ पर उपदेश देना शुरू किया था।

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल,1469 को तलवंडी में हुआ था जो कि पकिस्तान में है। गुरु नानक देव जी सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक थे। अपने जीवन काल के दौरान गुरु नानक देव जी ने कईं स्थानों की यात्रा की। उन्होंने लोगों को एक ईश्वर का सन्देश सुनाया और उन्हें जीवन जीने का सही तरीका सिखाया। सिख समुदाय के लोग गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को कातक महीने की पूर्णमाशी को मनाते हैं।

श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर नगर कीर्तन 100 दिनों में देश के 17 राज्यों के 65 शहरों से होते हुए सुल्तानपुर लोधी स्थित गुरुद्वारा बेर साहिब में संपन्न होगा। वतन पहुंचने के बाद नगर कीर्तन सिख धर्म के सभी तख्त साहिबान में पहुंचे। नगर कीर्तन तख्त श्री केसगढ़ साहिब, तख्त पटना साहिब, तख्त श्री पटना साहिब और तख्त श्री हजूर साहिब के साथ-साथ ऐतिहासिक गुरुद्वारा नानक झिरा में भी जाएगा। नगर कीर्तन का पहला पढ़ाव दरबार साहिब अमृतसर था जिसके बाद डेरा बाबा नानक पंजाब से होते हुए बर्थ साहिब से जम्मू से गुज़रा। फिलहाल नगर कीर्तन कल रविवार को चंडीगढ़ पहुंचा जहाँ संगत श्री गुरुग्रंथ साहिब और गुरु साहिब की निशानियों के दर्शन के लिए उमड़ी थी। संगत ने पुष्पवर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया।

नगर कीर्तन में एसजीपीसी की वैन में पुरातन शस्त्रों के अलावा पहली बार गुरु नानक देव जी की खड़ाऊं संगत की दर्शन को नगर कीर्तन में रखी गई। पालकी की सजावट रंग बिरंगे फूलों से की गयी है जिसकी शोभा देखते ही बनती है। नगर कीर्तन के आगे स्कूली बच्चे अपने बैंड के साथ करतब दिखाते नज़र आए और गतका पार्टियों ने मार्शल आर्ट्स में ज़ोहर दिखाए। साथ साथ सफाई के प्रबंध भी किये गए हैं।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत और पाकिस्तान में उपजे तनाव का अंतरराष्ट्रीय नगर कीर्तन पर कोई असर नहीं पड़ा है। कड़ी सुरक्षा के बीच नगर कीर्तन जम्मू से भी निकाला गया। नगर कीर्तन इंसानियत का पैगाम लोगों को देते हुए विभिन्न राज्यों से गुज़रा जिसका हर वर्ग व् धर्म के लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया।

गुरु नानक देव जी की जन्म भूमि से रवाना हुआ नगर कीर्तन 17 राज्यों से गुज़रता हुआ सुल्तानपुर लोधी स्थित गुरुद्वारा बेर साहिब में संपन्न होगा। हमें देखने को मिला कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर में निकाले गए नगर कीर्तन में सभी लोगों को एक सामान भाग लेना का अवसर मिला। यहाँ पर समाज द्वारा बनाए गए मतभेद नहीं देखे गए जबकि लोग ऐसे मतभेद की जंजीरों को तोड़ते नज़र आए। जात-पात व् सामाजिक दर्जे का यहाँ पर कोई अस्तित्व नहीं है। गुरु नानक देव जी के दिए गए वचनों का पालन करते हुए नगर कीर्तन को सिख, सफल बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

गुरु नानक देव जी के सिद्धांतों के अनुसार “मानस की जात सभे एक है पछानो। ” आज के दौर में जहाँ हर तरीके से सामाजिक बंटवारा हो रहा है, लोगों को गुरु नानक देव जी के इस सिद्धांत की एहमियत समझते हुए पालन करना चाहिए। हमें ज़रुरत है कि हमारे गुरुओं के दिए गए वचनों का हमें पालन करना चाहिए ताकि हम जाति, धर्म या अन्य भेदभाव से उठ कर एक अच्छे इंसान बनने की कोशिश करें और इंसानियत को मज़बूत बना सकें। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर निकाले जाने वाले अंतराष्ट्रीय नगर कीर्तन को सफल बनाने के लिए आप भी अपना योगदान दे सकते हैं।