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उपराज्यपाल बोले: जम्मू-कश्मीर में कोरोना के बीच उत्पादन शुरू न कर पाने वाले उद्योगों को मार्च तक पंजीकरण करवाने की मोहलत

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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर में निजी भूमि पर भी जल्द उद्योग लगाने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए भूमि उपयोग के परिवर्तन से जुड़े नियम तैयार किए जा रहे हैं। नए नियमों के तहत भूमि को निर्धारित शर्तों के साथ किसी दूसरे उपयोग में लाया जा सकेगा। कोरोना की वजह से कई सारी नई औद्योगिक इकाइयां अपना उत्पादन दी गई समय सीमा में शुरू नहीं कर पाई थी। इसलिए हम ऐसी इकाइयों को 31 मार्च 2022 तक पंजीकरण कराने के लिए एक बार विस्तार दे रहे हैं।

कोलकाता में उद्योग जगत से जुड़े लोगों से चर्चा में एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में निवेश अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है। 31 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं और वित्तीय वर्ष के अंत तक 51 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य है। कहा कि जब 28400 करोड़ रुपये की नई औद्योगिक योजना का प्रारूप तैयार किया गया था तो उसमें चार तरह के प्रोत्साहन मुख्य थे। यह 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। लेकिन जिस तरह के निवेश और उत्साह हमें मिल रहे हैं, मांग को पूरा करने के लिए इस योजना में उचित बढ़ोतरी करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

हमें इतने निवेश और लगातार आ रहे निवेश प्रस्ताव की उम्मीद नहीं थी। इसलिए हमने जो लैंड बैंक तैयार किया है अब उसे और भी विस्तृत किया जाएगा। इसके लिए भू उपयोग में बदलाव संबंधी नीति जल्द घोषित होगी। कहा कि बहुत से उद्योग ऐसे हैं जो खुद ही जमीन ढूंढ रहे हैं। निजी भूमि पर भी जो उद्योग आ रही हैं वह वर्तमान नीति के तहत सभी प्रकार की प्रोत्साहन की हकदार होंगी। उपराज्यपाल ने कहा कि नए नियमों से निजी भूमि पर उद्योग लगाना आसान हो जाएगा। वर्तमान में सरकार की ओर से विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में ही उद्योग लगाए जाते हैं।

निजी भूमि पर लगने वाले व्यावसायिक उद्यमाें को तमाम सुविधाएं और लाभ मिलेंगे। जम्मू-कश्मीर देश में सबसे तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र बनने वाला है। प्रदेश में नवीनीकरण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया एक अभियान के तौर पर चल रही है। वाणिज्य और व्यापार की बाधाओं को हटा दिया गया है।

इस दौरान उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर ने उद्योग के सदस्यों को जम्मू-कश्मीर का दौरा कर जमीनी बदलाव देखने को कहा। सीआईआई पश्चिम बंगाल के उपाध्यक्ष और हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स के पूर्णकालिक निदेशक सुभाषेंदु चटर्जी ने भरोसा जताया कि जम्मू-कश्मीर में चल रहे प्रयास इस प्रदेश को उद्योग जगत के लिए बेहतर माहौल तैयार करेंगे। अंकिता कार एमडी जेकेटीपीओ ने जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उद्योग समूह में से टाटा स्टील, अनमोल फीड्स, एवरेडी इंडस्ट्री, केसीटी इंडस्ट्रीज आदि शामिल हुए।

कहा कि संस्कृति कारोबार का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। आज मैं पूरे आत्मविश्वास से कह सकता हूं कि हम जम्मू-कश्मीर में आजादी के बाद से ही नदारद कारोबारी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। किसी भी कारोबार में नैतिक मूल्य, दूरदर्शिता एवं पारदर्शी कॉरपोरेट नीतियां सर्वोपरि होती हैं। वैश्वीकरण के इस दौर में भी हम नैतिक मूल्यों, पारदर्शी व्यवस्था को अपने कारोबार का अभिन्न अंग मानते हैं। कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही 25 नए राष्ट्रीय राजमार्ग का शिलान्यास हुआ है और 11 हाईवे बनकर तैयार हो चुके हैं। जनवरी 2023 तक कश्मीर रेल मार्ग से कन्याकुमारी से जुड़ जाएगा।

उप राज्यपाल ने कहा कि पिछले 16 महीनों में बिजनेस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए, उद्यमियों की सहूलियत के लिए हमने 160 से ज्यादा सुधार किए हैं। हैदराबाद के बाद जम्मू-कश्मीर देश का दूसरा ऐसा क्षेत्र है जहां महिला उद्यमियों के लिए उधमपुर औद्योगिक क्षेत्र में जगह मुहैया कराई जा रही है। कहा कि जम्मू कश्मीर प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है।

तमाम कच्चे संसाधन के अलावा बागवानी में नंबर वन होने की वजह से खाद्य प्रसंस्करण में काफी संभावनाएं हैं। जम्मू कश्मीर में सिर्फ संस्कृति ही समृद्ध नहीं है बल्कि वहां कारोबार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध है। एकल खिड़की क्लीयरेंस के जरिये 120 सेवाओं को आनलाइन किया जा रहा है और जल्द ही उसे राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली से जोड़ा जाएगा। जम्मू कश्मीर देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश होगा जो इस साल दिसंबर तक सभी 301 कारोबार सुधार कार्ययोजना पूरा कर लेगा।

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करते हुए कहा कि अगस्त 2019 के बाद से जम्मू कश्मीर अपराधमुक्त, भयमुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त केंद्र शासित प्रदेश हो गया है। जुलाई महीने में जम्मू कश्मीर में 10.5 लाख पर्यटक आए थे। अगस्त में यह आंकड़ा 11.28 लाख, सितंबर में 12.8 लाख और अक्तूबर में 13 लाख को पार कर गया। यह आंकड़े स्वयं जम्मू-कश्मीर की शांति व्यवस्था का प्रमाण हैं।

उद्योगों को दक्ष मजदूरों की भी आवश्यकता है। आज जम्मू कश्मीर की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम है और उन्हे इंडस्ट्री 4.0 की तकनीकी ट्रेनिंग पर भी हम टाटा टेक्नालाजी की मदद से काम कर रहे हैं और स्कूल स्तर से ही वोकेशनल ट्रेनिंग शुरू कर दिया गया है।