Home Jammu Kashmir Jammu उत्तराखंड के बाद क्या जम्मू-कश्मीर को भी है बड़ा खतरा, यहा जानें

उत्तराखंड के बाद क्या जम्मू-कश्मीर को भी है बड़ा खतरा, यहा जानें

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उत्तराखंड के चमोली में जल प्रलय के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौजूद ग्लेशियरों के प्रति संवेदनशील होने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों प्रदेशों के हिमालय क्षेत्र में 5500 छोटे बड़े ग्लेशियर सक्रिय हैं। इनके पिघलने की दर उत्तराखंड व सटे इलाकों की तुलना में काफी कम है, लेकिन जानकार ग्लेशियरों के नजदीक वाले क्षेत्रों में बेतरतीब और खासकर कंक्रीट निर्माण से परहेज पर जोर दे रहे हैं। जम्मू विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर आरके गंजू कहते हैं कि हिमालय रेंज के उत्तर पूर्व हिस्से में करीब 13000 छोटे बड़े ग्लेशियर सक्रिय हैं, जिसमें कश्मीर और लद्दाख में करीब 5500 ग्लेशियर हैं।जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ग्लेशियर उत्तर पूर्व के ग्लेशियर की तुलना में कम पिघल रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ग्लेशियर उत्तराखंड की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। यहां झीलों का निर्माण बहुत कम हुआ है। उत्तर पूर्व में नेपाल के आगे वाले हिस्सों में ग्लेशियर अधिक संवेदनशील हैं, जबकि पिछले हिस्से में ऐसा नहीं है। कंक्रीट के निर्माण बढ़ने से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ जाती है, जिससे बचना होगा।

कंक्रीट निर्माण से बढ़ता है तापमान

हिमालय क्षेत्र के तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए मिट्टी के घर सबसे उपयुक्त होते हैं। कंक्रीट के ढांचे स्थानीय तापमान में वृद्धि करते हैं, जिसका असर ग्लेशियरों तक जाता है। कई साल पहले लद्दाख के चोगलामसर गांव में जलप्रलय हुई थी। वहां वातावरण के विपरीत वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ मिट्टी के बजाय आरसीसी (सीमेंट) के निर्माण किए गए। उच्च पर्वतीय क्षेत्रों खासकर ग्लेशियर वाले हिस्सों में यदि सीमेंट का निर्माण होता है तो उससे खतरा बढ़ जाता है। सीमेंट तपिश उत्पन्न करता है। बड़े पैमाने पर निर्माण से अधिक तपिश निकलती है जो बाहर न जाकर वहीं भीतर रह जाती है। इससे ग्लेशियर पिघलने के हालात बनने लगते हैं। प्रो. गंजू ने बताया कि उनकी टीम ने दो दशक से अधिक समय में कारगिल जंस्कार के द्रुंगद्रुंग, लद्दाख नूबरा में सियाचिन, द्रास के मचोई, कारगिल के कांग्रेज (सभी कराकोरम शृंखला वाले ग्लेशियर) और हिमाचल के नारदू ग्लेशियर पर शोध किया है। यहां के ग्लेशियर में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया है। इस शृंखला के ग्लेशियर भारत और पाकिस्तान में हैं।

चमोली में जलप्रलय के हो सकते हैं यह कारण

प्रो. गंजू कहते हैं कि उत्तराखंड के चमोली जिले में हुई जलप्रलय के कई कारण हो सकते हैं। देहरादून से हिमालयन जियोलॉजी की टीम वहां जांच के लिए भेजी गई है। जल प्रलय की वजह उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटना (अचानक जोरदार बारिश), बर्फ पर ओवरलोड होकर ग्लेशियर का टूटना, छोटे भूकंप से ग्लेशियर में दरार आकर टूटना, किन्हीं कारणों से ग्लेशियर फ्रंट के हिस्से का टूटना आदि हो सकती हैं।