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अफगानिस्तान में जंग अभी जारी है.. इन हाथों में है तालिबान के खिलाफ लड़ाई की कमान

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अफगानिस्तान में बड़े हिस्से पर कब्जा कर तालिबान ने भले ही फतह का दावा कर दिया है, लेकिन अभी जंग खत्म नहीं हुई है। एक धड़ा अभी भी लगातार तालिबान के खिलाफ लड़ रहा है।

अमरुल्ला सालेह

तालिबान के खिलाफ लड़ाई में सबसे पहला नाम अमरुल्ला सालेह का आता है। वह अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट (एफपीवी) थे और राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद संविधान के तहत उन्होंने स्वयं को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। पिछले ढाई दशक से तालिबान के खिलाफ लड़ रहे सालेह ने कहा है कि वह अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़े हैं और जंग अभी खत्म नहीं हुई है।

अहमद मसूद

पंजशीर अफगानिस्तान का इकलौता प्रांत है, जहां अब तक तालिबान कब्जा नहीं कर पाया है। यहां तालिबान से लोहा लेने वालों में नॉर्दर्न अलायंस के अहमद मसूद का नाम सबसे अहम है। हाल में सालेह से उनकी मुलाकात की तस्वीर सामने आई थी। अहमद मसूद के पिता अहमद शाह मसूद को अफगानिस्तान की सबसे ताकतवर शख्सियतों में शुमार किया जाता था। 2001 में अल कायदा और तालिबान ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी। अब अहमद मसूद तालिबान को हर हाल में रोकने के लिए संघर्षरत हैं।

अता मुहम्मद नूर

जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख और बल्ख प्रांत के पूर्व गवर्नर अता मुहम्मद नूर भी तालिबान के खिलाफ मोर्चा संभाले लोगों में शामिल हैं। जब 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता संभाली तो उन्होंने अहमद शाह मसूद के साथ मिलकर तालिबान के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा तैयार किया था। अभी बल्ख प्रांत पर तालिबान के कब्जे के बाद से माना जा रहा है कि वह ताजिकिस्तान के इलाके में चले गए हैं।

अब्दुल रशीद दोस्तम

67 साल के अब्दुल रशीद दोस्तम अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति भी रह चुके हैं। 2001 में अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को गिराने में दोस्तम ने अमेरिकी सेना की काफी मदद की थी। दोस्तम का अफगानिस्तान के उत्तरी इलाकों में दबदबा है। बताया जा रहा है कि वह इस वक्त उज्बेकिस्तान में हैं।

आतंक के सात चेहरे

1. हैबातुल्ला अखुंदजादा, सुप्रीम कमांडर

1961 में जन्मा हैबातुल्ला अखुंदजादा तालिबान का तीसरा सुप्रीम कमांडर बना है। यह इस आतंकी संगठन का सर्वोच्च पद है। सुप्रीम कमांडर बनने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

2. अब्दुल गनी बरादर, डिप्टी कमांडर

अब्दुल गनी बरादर ही इस समय तालिबान का मुख्य चेहरा बना हुआ है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में बनने वाली तालिबान सरकार का मुखिया वही होगा। अमेरिका और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के संयुक्त अभियान में 2010 में उसे गिरफ्तार किया गया था। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से शांति वार्ता के दौरान 2018 में अफगानिस्तान में अमेरिका के विशेष राजदूत जालमे खलीलजाद के प्रयासों से उसे रिहा किया गया।

3. सिराजुद्दीन हक्कानी

अमेरिका की ओर से घोषित आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान में तीसरे सबसे अहम पद पर है। माना जाता है कि वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान में संगठन के वित्तीय और सैन्य मामले संभालता है।

4. मुहम्मद याकूब

मुहम्मद याकूब तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का बेटा है। उसके बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। बताया जा रहा है कि वह हक्कानी के साथ मिलकर संगठन की मिलिट्री गतिविधियों को संभालता है।

5. अब्दुल हकीम हक्कानी

इसे हैबातुल्ला अखुंदजादा का बहुत करीबी माना जाता है। अमेरिका की पिछली सरकार से शांति वार्ता में इसने अहम भूमिका निभाई थी। वह अफगानिस्तान में मजहबी लोगों की एक काउंसिल का प्रमुख भी है।

6. शेर मुहम्मद अब्बास

आतंकी संगठन के अन्य प्रमुख लोगों से इतर शेर मुहम्मद अब्बास बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलता है। पिछली बार जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था, तब वह बतौर उप विदेशी मंत्री कई देशों के दौरे पर गया था।

7. जबीहुल्ला मुजाहिद

जबीहुल्ला ने हाल ही में काबुल में तालिबान की पहली प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया था। माना जा रहा है कि दुनिया के सामने आतंकी संगठन को पेश करने में उसकी अहम भूमिका रहेगी। पिछले 20 साल से वह बस मैसेज के जरिये मीडिया से बात करता रहा है। 17 अगस्त को पहली बार वह सामने आया।